गई रुत की भटकती राह में फिर ले चलें खुद कोतुम्हें आवाज़ दें , फिर ज़िंदगी तेरा पता ढूँढें
ख़ूबसूरत ब्लॉग , सुन्दर कवितायेँ और शेर . आप जो भी करेंगे अच्छा ही करेंगे.
"जो दिल का दर्द न समझे नज़र कि ओट हो जाये हमें है क्या ग़रज़ कि हम उसी का आसरा ढूंढें"
जनाब रूप साहब, आदाब...उम्दा शायरी पेश करने के लिए मुबारकबाद.उम्मीद है इसी तरह का कलाम आगे भी पढ़ने को मिलेगा...कभी वक्त मिले तो जज़्बात جذبات Jazbaat पर भी तशरीफ़ लाएं.
गई रुत की भटकती राह में फिर ले चलें खुद को
ReplyDeleteतुम्हें आवाज़ दें , फिर ज़िंदगी तेरा पता ढूँढें
ख़ूबसूरत ब्लॉग , सुन्दर कवितायेँ और शेर . आप जो भी करेंगे अच्छा ही करेंगे.
ReplyDelete"जो दिल का दर्द न समझे नज़र कि ओट हो जाये
ReplyDeleteहमें है क्या ग़रज़ कि हम उसी का आसरा ढूंढें"
जनाब रूप साहब, आदाब...
ReplyDeleteउम्दा शायरी पेश करने के लिए मुबारकबाद.
उम्मीद है इसी तरह का कलाम आगे भी पढ़ने को मिलेगा...
कभी वक्त मिले तो
जज़्बात جذبات Jazbaat
पर भी तशरीफ़ लाएं.