हम सुखनवर, आइये, रौनक़ बढ़ाएँ साथ साथ इस नयी आहट से हम महफ़िल सजाएं साथ साथ खैर मक़दम हम करें, मिल कर कहें खुशआमदीद 'रूप' से बातें करें, खुशियाँ मनाएं साथ साथ
बहुत ख़ूब! ख़ुदा करे आप की ये ख़्वाहिश ज़रूर पूरी हो, दानिश साहब ने पूरे ब्लॉग जगत की तरफ़ से आप का ख़ैर मक़दम इतने ख़ूबसूरत तरीक़े से कर दिया है कि हम लोगों के लिये कुछ बचा ही नहीं इस बात की भी ख़ुशी हुई कि मैं भी इलाहाबाद विश्वविद्यालय की छात्रा रही हूं
रूप जी
ReplyDeleteनमस्कार !
अच्छा मुक्तक है , बधाई !
पढ़ने के बाद कहने को मन हो रहा है -
गीत गाएं गुनगुनाएं साथ साथ
आपकी पहली पोस्ट है … स्वागत है ब्लॉगजगत की हसीन दुनिया में !
शुभकामनाओं सहित
- राजेन्द्र स्वर्णकार
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ReplyDeleteहम सुखनवर, आइये,
ReplyDeleteरौनक़ बढ़ाएँ साथ साथ
इस नयी आहट से हम
महफ़िल सजाएं साथ साथ
खैर मक़दम हम करें,
मिल कर कहें खुशआमदीद
'रूप' से बातें करें,
खुशियाँ मनाएं साथ साथ
"मुझको मालूम ना था आज से पहले ये कभी
ReplyDeleteइतनी मुश्किल है बात दिल कि रूबरू कहना"
"रूप"
शुक्रिया .
बहुत ख़ूब!
ReplyDeleteख़ुदा करे आप की ये ख़्वाहिश ज़रूर पूरी हो,
दानिश साहब ने पूरे ब्लॉग जगत की तरफ़ से आप का ख़ैर मक़दम इतने ख़ूबसूरत तरीक़े से कर दिया है कि हम लोगों के लिये कुछ बचा ही नहीं
इस बात की भी ख़ुशी हुई कि मैं भी इलाहाबाद विश्वविद्यालय की छात्रा रही हूं