Tuesday, November 16, 2010

Gungunayein Sath Sath

"ज़िन्दगी के  गीत गाएं गुनगुनाएं  साथ  साथ
आज  हर  दुःख  भूल  जाएं  मुस्कुराएं साथ  साथ
हम   भले  ही  बन  न  पाएं चाँद  तारों  की तरह 
दूर  कर  दें ये  अँधेरे  टिमटिममाएं साथ साथ "

5 comments:

  1. रूप जी
    नमस्कार !

    अच्छा मुक्तक है , बधाई !
    पढ़ने के बाद कहने को मन हो रहा है -
    गीत गाएं गुनगुनाएं साथ साथ

    आपकी पहली पोस्ट है … स्वागत है ब्लॉगजगत की हसीन दुनिया में !

    शुभकामनाओं सहित
    - राजेन्द्र स्वर्णकार

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  3. हम सुखनवर, आइये,
    रौनक़ बढ़ाएँ साथ साथ
    इस नयी आहट से हम
    महफ़िल सजाएं साथ साथ
    खैर मक़दम हम करें,
    मिल कर कहें खुशआमदीद
    'रूप' से बातें करें,
    खुशियाँ मनाएं साथ साथ

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  4. "मुझको मालूम ना था आज से पहले ये कभी
    इतनी मुश्किल है बात दिल कि रूबरू कहना"
    "रूप"
    शुक्रिया .

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  5. बहुत ख़ूब!
    ख़ुदा करे आप की ये ख़्वाहिश ज़रूर पूरी हो,
    दानिश साहब ने पूरे ब्लॉग जगत की तरफ़ से आप का ख़ैर मक़दम इतने ख़ूबसूरत तरीक़े से कर दिया है कि हम लोगों के लिये कुछ बचा ही नहीं
    इस बात की भी ख़ुशी हुई कि मैं भी इलाहाबाद विश्वविद्यालय की छात्रा रही हूं

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